मैं और मेरी दिल्ली

Me or Meri Delhi

दिल्ली अपनी दिल्ली ढ़ेरों सपनों से भरी
हम अपनों से भरी कुछ तो है इसमें ..
हम जितना इसके करीब जाते हैं
वो हमारे और करीब आ जाती है
जब-जब इसको देखता हूँ हर बार….
कुछ नयी सी लगती है मुझे बहुत सा पत्थर है इसमें
पर अब तक पत्थर दिल नही हुई हर बार कुछ नया सिखाती ये दिल्ली
हर बार कुछ नया दिखाती ये दिल्ली
मेरी , आपकी , हम सबकी दिल्ली…..!!!
मैं और मेरी दिल्ली।